शुक्रवार, 21 अगस्त 2015

भगत सिंह के आखिरी लम्हे

जब भगत सिंह को फांसी देने का समय आ गया और जेलकर्मी उन्हें उनकी बैरक से लेने आये तो देखा भगत कोई किताब पढ़ रहे है।

जेलकर्मी ने जल्दी चलने को कहा तो क्रन्तिकारी नेता ने जवाब दिया

"थोड़ा रुक जाओ, लेनिन को पढ़ रहा हूँ, एक क्रन्तिकारी दुसरे क्रन्तिकारी से बात कर रहा है"

जेलकर्मी खड़े रहे, कुछ पलों बाद भगत उस किताब को जितना पढ़ चुके थे वहीं से पन्ना मोड़ कर चल दिए फांसी घर की ओर ।

आज देश के तमाम नौजवानों युवाओं की ज़रूरत है कि भगत की किताब के उस मुड़े पन्ने को फिर से खोलें,

एक नई शुरुआत करते हुए उस लड़ाई को और आगे बढ़ाकर इस अधूरी आज़ादी को पूरी आज़ादी यानी पूर्ण स्वराज में परिवर्तित करें ।

~इमरान~


1 टिप्पणी:

  1. इमरान भाई
    तुम्हारा फेसबुक एकाउंट है क्या
    अगर है तो लिंक दो

    जवाब देंहटाएं