शनिवार, 1 अगस्त 2015

प्रेमचन्द के जन्मदिन पर

वास्तविक भारत के क़लमनवीस,

प्रेमचन्द बंगलों में आरामफ़र्मा रइसज़ादों को असली भारत की तस्वीर दिखाने वाले लेखक
प्रेमचन्द यानी विकास के और तरक़्क़ी के फाइली कागज़ी आंकड़ें प्रस्तुत करने वाली सरकारों को आइना दिखाकर उन्हें खुद उनकी ही नज़रों में गिरा देने वाले सत्यवादी साहित्यकार

फिल्मकार प्रेमचन्द......फिल्मकार?? जी हाँ !
लेकिन पर्दे वाली नही....क़लम वाली फ़िल्म,
वो ऐसे के जब आप उनको पढ़ें तो आपको ऐसा लगे कि वाक़ई अपने सामने देख रहे हैं प्रेमचन्द के ग्रामीण भारत यानि असली भारत को ।

प्रेमचन्द यानी असली किसान,
प्रेमचन्द यानी असली भारत,शानदार लेखक प्रेमचन्द.... अतुलनीय सहित्यकार प्रेमचन्द ।

प्रेमचन्द को लेकर एक किस्सा बड़ा मशहूर है ।
हुआ यूँ कि एक बार प्रेमचन्द महादेवी वर्मा से मिलने उनके आवास पर गए तो पता चला लेखिका महोदया अभी स्नानरत हैं।

सो मनमौजी प्रेमचन्द टहलते हुए उनके बगीचे में चले गए और महादेवी वर्मा के घरेलू नौकरों से बतियाने लगे।

कुछ ही देर में जब महादेवी नहाकर वापस आयीं और प्रेमचन्द को बगीचे में नौकरों के साथ बैठे देखा तो आश्चर्य मिश्रित शर्मिंदगी का भाव चेहरे पर लिए पूछ बैठीं,-

" अरे आप यहां क्या कर रहे हैं अंदर बैठना था आराम से"

तब प्रेमचन्द ने एक तारीखी जवाब दिया...

-""कुछ ख़ास नहीं बस अपनी कहानियों के किरदारों से बातचीत कर रहा था"

हमने इसे तारीखी जुमला क्यों कहा ये आपकी फ़िक्र के हवाले... लेखकों की जीवनियां पढ़िए और सोचिये इस तारीखी जुमले के अदाकर्दा साहित्यकार और दूसरे लिखने वालों में क्या फर्क है

महादेवी मुस्कुरा भर दी थीं...

कितने लेखक होते होंगे जो सिर्फ किताबों में लिख देने के बजाए अपने उन किरदारों के पास भी जाते होंगे?उनसे बातचीत भी करते होंगे...

प्रेमचन्द का सादा जीवन, सस्ते कपड़े, फ़टे हुए मोज़े...
(बाद में उनके बैंक खाते से निकली राशि पर फूहड़ किस्म के विवाद को परे रखकर)....बहरहाल उनके कहानियों के किरदारों और उनके बीच एक वास्तविक सा लगने वाला संबंध स्थापित करते हैं ।

वास्तविक यानी ग्रामीण भारत की असल तस्वीर प्रस्तुत करने वाले और उसकेशोषण की सर्वाधिक जीवंत व्यवहारिक और वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत करने वाले प्रेमचन्द कि आज जन्मतिथि है....

मेरी ओर से उन्हें ये उनके क़दमों की धुल से भी छोटी भावभीनी श्रद्धांजलि और इंक़लाबी सलाम ।

~इमरान~

2 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छा वर्णन है दो जगह शेयर कर दिया है।

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    1. धन्यवाद मेरे लिए गौरव का विषय है की आप जैसे बुद्धिजीवी व्यक्तियों ने हम नवोदित लेखकों के लेख को साझा करने योग्य समझा विजय सर ।

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